ये राजनीती का नहीं, ये कसूर अपना है
हमने नेता नहीं ,धर्म जाति और मज़हब चुना है
देश जल गया क्योंकि हमने उसे जलने दिया
हमने अपने स्वार्थ के लिए देश को बेच दिया |
चंद पैसे में बिक जाते है वोट यहाँ
चरों तरफ मची है लूट यहाँ
वो लूट गए हमारे देश को और हमने कुछ नहीं किया
हमने अपने स्वार्थ के लिए देश को बेच दिया |
- ध्रुव कुमार शाक्यवार
No comments:
Post a Comment