Sunday, May 22, 2011

तुम्हारे सिवा


मैं
कुछ भी नहीं हूँ तुम्हारे सिवा
यह दुनिया तो है खाली तुम्हारे सिवा
मुहब्बत तुम्हारी है दिल में मेरे
दिल में नही कुछ तुम्हारे सिवा

तुम्हारी आवाज़ को तरस के रोता हूँ मैं
सुनना चाहता नहीं कुछ तुम्हारे सिवा
आँखों में तेरा अक्स ले कर बैठा हूँ
दिखता नहीं मुझे कुछ तुम्हारे सिवा

मेरी आँखों से गिरते हुए मोंती तो देखो
इन मैं याद नहीं किसी की तुम्हारे सिवा
हशर मैं रब पूछेगा...क्या चाहिए ?
मैं कहूँगा कुछ भी नहीं, तुम्हारे सिवा

- ध्रुव कुमार शाक्यवार

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