Monday, May 23, 2011

कहीं खो गए

कहीं खो गए है वो पल
जब तुम मेरे साथ होती थी
तुम्हारी प्यारी प्यारी बातें सुनकर
यह कुदरत भी हंस देती थी

मिलना बिछड़ना रोज़ का काम था
दूर रहकर भी तुम्हारा साथ था
मैं खुद कभी तन्हा नहीं था
हर पल तेरी यादों का साथ था

दूर कही किसी पेड़ के नीचे
तेरी यादों में आँखें मीचे
तेरा इंतज़ार मै करता था
हर आहट को तेरी आहट समझता था

तुम्हारे आने से जैसे बहार आ जाती थी
तपती धूप मै बदली छा जाती थी
झूम उठता था जैसे ये आकाश
ऐसा होता था  तेरे आने का एहसास

याद आता है तेरा वो चुपके से चले आना
आँखें मूदकर मेरी पूछना बताओ पहचाना
इन सब की मुझे आदत पड़ चुकी थी
तुम्हारे आने की खबर मुझे हवा दे देती थी

फिर से उन पलो में खो जाने को दिल चाहता है 
तेरा चेहरा अब भी इन आँखों में है ये बताने को दिल चाहता है
तुम अब भी मेरे लिए ख़ास हो, तुम अब भी मेरे पास हो 
तुम मेरे खयाले मैं हो , तुम मेरी नज़र के उजाले मैं हो 
 
तुम भी उन पलो को अगर याद करती हो 
तो चुपके से उसी तरह वापस चली आना 
तुम्हारे इंतज़ार में कही ये जिंदगी काम न पड़ जाये 
बस इतना था बतलाना, बस इतना था बतलाना |
                                                  --- ध्रुव कुमार शाक्यवार



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